Skip to main content

Posts

Showing posts with the label संगृहीत हिंदी कहानिया

हम खुद अन्दर से कितने साफ़ हैं?

आदित्य एक बार की बात है , एक नौविवाहित  जोड़ा किसी किराए के घर में रहने पहुंचा . अगली सुबह , जब वे नाश्ता कर रहे थे , तभी पत्नी ने खिड़की से देखा कि सामने  वाली छत पर कुछ कपड़े फैले हैं , – “ लगता है इन लोगों को कपड़े साफ़ करना भी नहीं आता …ज़रा देखो तो कितने मैले लग रहे हैं ? “ पति ने उसकी बात सुनी पर अधिक ध्यान नहीं दिया . एक -दो दिन बाद फिर उसी जगह कुछ कपड़े फैले थे . पत्नी ने उन्हें देखते ही अपनी बात दोहरा दी ….” कब सीखेंगे ये लोग की कपड़े कैसे साफ़ करते हैं …!!”  पति सुनता रहा पर इस बार भी उसने कुछ नहीं कहा .पर अब तो ये आये दिन की बात हो गयी , जब भी पत्नी कपडे फैले देखती भला -बुरा कहना शुरू हो जाती . लगभग एक महीने बाद वे यूँहीं बैठ कर नाश्ता कर रहे थे . पत्नी ने हमेशा की तरह नजरें उठायीं और सामने वाली छत की तरफ देखा , ” अरे वाह , लगता है इन्हें अकल आ ही गयी …आज तो कपडे बिलकुल साफ़ दिख रहे हैं , ज़रूर किसी ने टोका होगा !” पति बोल , ” नहीं उन्हें किसी ने नहीं टोका .”...

समय बदलने में वक़्त नही लगता !

कल रात मुझे एक स्वप्न आया। मैंने देखा कि मेरा सुख  का समय चल रहा था के और मैं समुद्र के किनारे की रेत  में चला जा रहा था। मैं जहाँ -जहाँ भी जा रहा था , वहाँ-वहाँ मेरे पैरों के निशान रेत में बने हुए थे। लेकिन  एक चमत्कारिक बात थी और वह यह कि रेत में एक जोड़ी के स्थान पर दो जोड़ी पैर दिख रहे थे। अर्थात,जहाँ-जहाँ भी मैं गया , ईश्वर मेरे साथ था। स्वप्न के दूसरेभागअब मेरा दुःख का समय था , मुसीबत का समय था ।  मैं तनाव तनाव तनाव में था,विपत्ति से जूझ रहा था। ऐसे समय में,ऐसे वक्त में भी मैं समुद्र के किनारे की रेत मैं चला जा रहा था। किंतु ,यह देख कर मुझे अत्यन्त दुःख हुआ कि ऐसे समय में रेत पर केवल एक जोड़ी पैरों के निशान ही दिख रहे थे।  अतः मुझसे न रहा गया और मैंने ईश्वर से शिकायत की कि हे ईश्वर ऐसा क्यों? विपत्ति के समय में आपने मेरा साथ छोड़ क्यों दिया?जब मेरे खुशहाली के दिन  थे ,जब मैं प्रसन्न था तब तब तो आप मेरे साथ थे और  विपत्ति में आपने मुझे क्यों छोड़ दिया?  इस पर ईश्वर ने उत्तर दिया ," अरे पगले ,मैंने विपत्ति ...

हाय राम, लोग भी कितने जालिम हैं .अच्छे भले सच्चे इंसान को झूठा कहते हैं

एक आदमी अपने इलाके में झूठ बोलने के लिए मशहूर था. लोग कहते कि वह दुनिया का सबसे बड़ा झूठा है. एक अस्सी साल की बुढ़िया को पता चला तो वह उसे देखने उसके गाँव आई. बुढ़िया ने झिझकते हुए उस आदमी से पूछा - "बेटा, क्या तुम ही वह सबसे बड़े  झूठे हो जिसके बारे में लोग बातें करते हैं ?" आदमी बोला - "लोगों की बात छोड़ो उन्हें तो दूसरों को बदनाम करने में मज़ा आता है .पर मैं तो आपको देखकर हैरान हूँ . इस उम्र में भी ये हुस्न ! . ये रंग !. और ये दिलकशी ! भगवान आपको बुरी नज़र से बचाए !" बुढ़िया (शरमाते हुए मन ही मन में ) - "हाय राम, लोग भी कितने जालिम हैं .अच्छे भले सच्चे इंसान को झूठा कहते हैं !!!" 

पृथ्वी पर खुशहाल वह् नहीं हैं जो अपनी शर्तों पर जीते हैं बल्कि खुशहाल वे हैं जो, जिन्हें वे प्यार करते हैं, उनके लिए बदल जाते हैं!

पत्नी ने पति से कहा, "कितनी देर तक समाचार  पत्र पढ़ते रहोगे? यहाँ आओ और  अपनी प्यारी बेटी को खाना खिलाओ". पति ने समाचार पत्र एक तरफ़ फेका और बेटी की ध्यान दिया, बेटी की आंखों में आँसू थे और सामने खाने की प्लेट. बेटी एक अच्छी लड़की है और अपनी उम्र के बच्चों से ज्यादा समझदार. पति ने खाने की प्लेट को हाथ में लिया और बेटी से बोला,"बेटी खाना क्यों नहीं खा रही हो? आओ बेटी मैं खिलाऊँ." बेटी जिसे खाना नहीं भा रहा था, सुबक सुबक कर रोने लगी और कहने लगी,"मैं पूरा खाना खा लूँगी पर एक वादा करना पड़ेगा आपको." "वादा", पति ने बेटी को समझाते हुआ कहा, "इस प्रकार कोई महँगी चीज खरीदने के लिए जिद नहीं करते." "नहीं पापा, मैं कोई महँगी चीज के लिए जिद नहीं कर रही हूँ." फिर बेटी ने धीरे धीरे खाना खाते हुये कहा, "मैं अपने सभी बाल कटवाना चाहती हूँ." पति और पत्नी दोनों अचंभित रह गए और बेटी को बहुत समझाया कि लड़कियों के लिए सिर के सारे बाल कटवा कर गंजा होना अच्छा नहीं लगता है. पर बेटी ने जवाब दिया, "पापा आपके कहने पर मैंने सड़ा खाना...